मद झूठा है ।
किसने सबकुछ पाया है?
कितने दिन जोड़ लिया?
पतझर ने आकर बोलो,
कौन सा पेड़ छोड़ दिया?
वसंत आना है ।
मंद बयारें आयेंगी।
बुलबुलें आस जगा लेंगी।
पर कितने दिन तक, कहो,
शाखाएँ यौवन सम्हालेंगी?
जग सच्चा-झूठा है।
बुरा लगे तो भी,
पतझड़ छाप छोड़ जाएगा।
भला लगे तो भी,
ऋतुराज थाप छोड़ जाएगा।
किन्तु-परन्तु कितना?
अल्हड़ होकर देखो कभी,
क्या बात हुई संदेह की!
झूम लो क्षणभर को,
फैला दो अंजुलि स्नेह की।
शुभ वसंत पंचमी
- टिम्सी मेहता
०२.०२.२०२५
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