Sunday, 2 February 2025

अंजुलि स्नेह की

मद झूठा है ।

किसने सबकुछ पाया है?

कितने दिन जोड़ लिया?

पतझर ने आकर बोलो,

कौन सा पेड़ छोड़ दिया?


वसंत आना है ।

मंद बयारें आयेंगी।

बुलबुलें आस जगा लेंगी।

पर कितने दिन तक, कहो,

शाखाएँ यौवन सम्हालेंगी?


जग सच्चा-झूठा है।

बुरा लगे तो भी,

पतझड़ छाप छोड़ जाएगा।

भला लगे तो भी,

ऋतुराज थाप छोड़ जाएगा।


किन्तु-परन्तु कितना?

अल्हड़ होकर देखो कभी,

क्या बात हुई संदेह की! 

झूम लो क्षणभर को,

फैला दो अंजुलि स्नेह की।


शुभ वसंत पंचमी 

- टिम्सी मेहता

०२.०२.२०२५

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